वर्धा, महाराष्ट्र – सामाजिक सशक्तिकरण दिवस के अवसर पर 20 मार्च 2025 को एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका विषय था “समकालीन भारत में सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दे: चुनौतियाँ और संभावनाएँ”। यह आयोजन सामाजिक सशक्तिकरण बहुउद्देशीय संस्था, वर्धा, महाराष्ट्र; डॉ. आंबेडकर कॉलेज ऑफ सोशल वर्क, वर्धा; डॉ. आंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल वर्क, नागपुर एवं श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़ के समाज कार्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।


20 मार्च का दिन सामाजिक सशक्तिकरण दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो महाड सत्याग्रह की स्मृति में महत्वपूर्ण है। 20 मार्च 1927 को डॉ. भीमराव आंबेडकर ने दलितों के लिए चवदार तालाब से पानी पीने का अधिकार हासिल करने हेतु सत्याग्रह किया था। यह घटना भारतीय जाति व्यवस्था और ब्राह्मणवाद के खिलाफ एक ऐतिहासिक चुनौती थी, जिसने सामाजिक समानता और मानव अधिकारों की लड़ाई को मजबूत किया। 2025 में इस सत्याग्रह के 98 वर्ष पूरे हुए, और यह संगोष्ठी उसी संघर्ष की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास थी। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य सामाजिक जागरूकता, शिक्षा, आर्थिक समानता, महिला सशक्तिकरण, और जाति, जेंडर व धर्म आधारित भेदभाव को समाप्त करने जैसे मुद्दों पर चर्चा करना था। यह आयोजन समकालीन भारत में सामाजिक-सांस्कृतिक चुनौतियों का विश्लेषण और उनके समाधान की संभावनाओं को तलाशने का मंच प्रदान करता है।


कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि लोकतंत्र और संविधान के साथ बाबा साहेब के विचारों पर चर्चा तथा वर्तमान सामाजिक समस्याओं पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने विकास का ढिंढोरा, पर्यावरणीय चिंता, सामंतवादी शक्तियाँ, विचारों की गुलामी और स्त्री-पुरुष संबंध जैसे मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए।


मुख्य वक्ता प्रो. बंशीधर पांडेय ने अपने वक्तव्य में समकालीन समाज में सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन के कारण उत्पन्न चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय संस्कृति में जातीय, नस्लीय और धार्मिक भेदभाव की समस्याओं का उल्लेख करते हुए, उनसे निपटने के लिए संभावित उपायों का मार्गदर्शन किया।


डॉ. सुप्रिया पाठक ने अपने वक्तव्य में डिजिटल युग में महिलाओं की समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने सावित्रीबाई फुले और जोतिबा फुले का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से महिलाएँ अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकती हैं।
तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. विनोद जी. गजघाटे, जोगदंड शिवाजी रघुनाथराव, डॉ. मेघा सिद्धपुरा और डॉ. मोनिष कुमार मुळे ने की, जबकि सह-अध्यक्ष के रूप में डॉ. परमानंद उके, डॉ. गजानन निलामे, डॉ. नरेश कुमार गौतम और डॉ. आम्रपाली गायकवाड उपस्थित थे।

इस सत्र में देश-विदेश के विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, आचार्य, सह-आचार्य, शोधार्थी एवं विद्यार्थी शामिल हुए। इस दौरान 45 उप-विषयों पर आधारित 80 से अधिक शोध-पत्रों और आलेखों का वाचन किया गया। प्रमुख विषय राष्ट्रीय सुरक्षा, जनसंख्या वृद्धि, महिला सुरक्षा, बाल अपराध, जातीय और लैंगिक भेदभाव आदि थे।
संगोष्ठी के दौरान सामाजिक सशक्तिकरण बहुउद्देशीय संस्था, वर्धा द्वारा सामाजिक मुद्दों पर प्रकाशित महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया गया:

  1. “सामाजिक सशक्तिकरण के विविध आयाम” (संपादक: श्री. प्रेमकुमार नाईक, डॉ. नरेश कुमार गौतम और डॉ. माधुरी हरिभाऊ झाडे)
  2. “भारतीय साहित्य में स्त्री विमर्श: परंपरा और आधुनिकता के परिप्रेक्ष्य में” (संपादक: अमनप्रीत और राहुल राऊत)
    संगोष्ठी में अतिथियों और वक्ताओं का स्वागत अमनप्रीत, अमित चौबे और प्रिया कुमारी ने किया, जबकि प्रस्तावना डॉ. नरेश कुमार गौतम ने प्रस्तुत की।
    रिपोर्ट लेखन का कार्य अमनप्रीत, सुदर्शन और स्नेहा राज ने किया, जबकि रिपोर्ट वाचन प्रिया कुमारी ने किया।
    संगोष्ठी के सफल आयोजन में श्री. प्रेमकुमार नाईक (अध्यक्ष एवं संगोष्ठी निदेशक), प्रो. मनोज कुमार (संगोष्ठी अध्यक्ष), डॉ. मिलिंद सवाई (सह-अध्यक्ष), डॉ. नरेश गौतम (संगोष्ठी संयोजक), डॉ. विनोद जी. गजघाटे और डॉ. सुनीता भोएकर का विशेष योगदान रहा।
    आयोजन समिति के सदस्य कांचन बांगर, अमनप्रीत, राहुल राऊत, प्रिया कुमारी और अमित चौबे ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

By जन स्वराज न्यूज़ 24

जन स्वराज न्यूज़ 24 स्वतंत्र और निष्पक्ष समाचार मंच, जो जनता की आवाज़ को प्राथमिकता देता है। सटीक, विश्वसनीय और त्वरित समाचारों के लिए हमसे जुड़ें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed