रायपुर, 24 मार्च। शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत की स्मृति में श्री रावतपुरा सरकार यूनिवर्सिटी के समाज कार्य विभाग एवं अंग्रेज़ी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता डॉ. नरेश गौतम ने असेम्बली बम कांड और अपील पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने 1930 में घटित घटनाओं पर प्रकाश डालते हुए भगत सिंह के प्रसिद्ध विचार को दोहराया—
“पिस्तौल और बम इंकलाब नहीं लाते, बल्कि इंकलाब की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।”
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक थे, जिनका योगदान भारतीय इतिहास में सदैव अमर रहेगा। शहीदों का जीवन वीरता, समर्पण और आत्मबल की अद्वितीय मिसाल प्रस्तुत करता है। उनकी दृढ़ता, साहस और बलिदान आज भी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। आगे उन्होंने अपनी बात रखते हुये बताया कि वर्तमान समय में भी वही चुनौतियाँ युवाओं के सामने हैं जो आजादी से पहले थी। देश में बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य की हालत खस्ता है। देश को सांप्रदायिक विचारों में विभाजित करने की कोशिश जारी है। आजादी की लड़ाई में हिंदुओं ने जीतने जाने दी उतना ही सहयोग मुस्लिमों का भी था। लेकिन देश की कुछ ताकते उस पूरी विरासत को ख़त्म कर सांप्रदायिक माहौल के लिए उपजाऊ जमीन तैयार करने में कामयाब हैं। भगत सिंह इस भारत की कभी कल्पना नहीं की थी। इस लिए आज भी भगत सिंह की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है.
अंग्रेजी विभाग के सहायक प्रोफेसर श्री बिक्रमजीत सेन ने अपनी बात रखते हुये शाहिदे आज़म भगत सिंह के नारे ‘जियो और जीने दो’ नारे के बारे में बात करते हुये बताया कि पूंजीवादी ने देश कि जड़ाो को खोखला कर दिया है। एक तरफ अमीरी है तो दूसरी तरफ बेहद गरीबी। यह खाई इतनी गहरी होती जा रही है। सामाजिक संघर्ष बढ़ता जा रहा है। जो आने वाली नस्लों के लिए ठीक नहीं। एक बेहतर समाज का निर्माण करना भगत सिंह का सपना था। लेकिन आज देश शहीदों कि कुर्बानी को भूल गया है। भगत सिंह के विचारों को आत्मसात कर बेहतर समाज के निर्माण के लिए युवाओं को आगे आने की आवश्यकता है।
*आभार ज्ञापन में डॉ. राशि ने कहा कि आज भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत को 94 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। हम उनके महान योगदान को नमन करते हैं। उनका जीवन और उनके विचार हमें यह सिखाते हैं कि जब देश की स्वतंत्रता और समाज की समृद्धि के लिए योगदान देने का समय आए, तो प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन को समर्पित करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों द्वारा शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर फैकल्टी ऑफ आर्ट्स के विभिन्न विषयों/क्षेत्रों के सहायक प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।