A monochrome image of a historical statue in Amritsar, Punjab, highlighting cultural heritage.

नई दिल्ली. नगीना सांसद और भीम आर्मी चीफ़, नेता चंद्र शेखर आज़ाद ने भारत के संविधान को मनुस्मृति और चाणक्य नीति जैसे सिद्धांतों से बदलने की कोशिशों की कड़ी निंदा की है। आज़ाद ने हिंदू राष्ट्र बनाने की बढ़ती साजिश पर भी आलोचना की, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संविधान की सार्वजनिक श्रद्धा जताने और प्रयागराज के महाकुंभ में नए संविधान के मसौदे की पेशकश करने वालों के बीच विरोधाभास को उजागर किया। अमर उजाला 25 जनवरी 2025 अखबार के अनुसार इसे बसंत पंचमी 3 फ़रवरी को लोगों के समक्ष रखने की रणनीति बनाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि मनुस्मृति में जातिवाद और लिंगभेद व्याप्त है और भारतीय संविधान की मूल्यों के खिलाफ है, जो सभी नागरिकों को स्वतंत्रता, समानता और न्याय की गारंटी देता है। आज़ाद ने चेतावनी दी कि ऐसी कोशिशें देश की एकता, लोकतंत्र और कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए खतरे की घंटी हैं। उन्होंने “डबल इंजन” सरकार से सवाल किया कि संविधान विरोधी विचारों को समर्थन देने वाले उपमुख्यमंत्री की उपस्थिति को लेकर क्यों चुप है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बार-बार प्रयागराज के दौरे को लेकर सवाल उठाया।

चंद्र शेखर आज़ाद का ट्विट:

आज़ाद ने दोहराया कि भारत की प्रगति संविधान के समानता, स्वतंत्रता और न्याय के सिद्धांतों पर निर्भर करती है, न कि किसी धर्म आधारित राज्य की अवधारणा पर। उन्होंने यह भी कहा कि उनका पार्टी संविधान की रक्षा के लिए किसी भी प्रयास का मुकाबला करेगी।

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By जन स्वराज न्यूज़ 24

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