नई दिल्ली: भीम आर्मी के प्रमुख और संसद सदस्य चंद्रशेखर आज़ाद ने संविधान दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए भारतीय संविधान को देश के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि संविधान दिवस केवल औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि युवाओं को संविधान के प्रति जागरूक और उत्तरदायी बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
चंद्रशेखर आज़ाद ने ट्वीट करते हुए कहा,
“केवल संविधान के सामने सिर झुकाने या धूमधाम से संविधान दिवस मनाने मात्र से नहीं बल्कि देश के सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों के पाठ्यक्रम में भारतीय संविधान सम्मिलित करने और शैक्षणिक संस्थानों में प्रार्थना के समय संविधान की उद्देशिका का वाचन अनिवार्य रूप से शामिल करने से ही देश की युवा पीढ़ी संविधान को सही अर्थों में अंगीकृत और आत्मार्पित कर पाएगी।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा करने से युवा न केवल संविधान के अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझेंगे, बल्कि देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी पहचान पाएंगे।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
चंद्रशेखर आज़ाद ने इस मांग को लेकर महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में भारतीय संविधान को एक विषय के रूप में शामिल करने और प्रार्थना सभा में संविधान की उद्देशिका का वाचन अनिवार्य करने का अनुरोध किया।
साथ ही, उन्होंने गांव, मोहल्लों, कस्बों और शहरों में “संविधान साक्षरता गोष्ठी” आयोजित कराने का भी सुझाव दिया, ताकि संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके। आज़ाद ने कहा कि यह पहल देश में संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने और नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों से अवगत कराने में सहायक होगी।
संवैधानिक जागरूकता की आवश्यकता
भीम आर्मी प्रमुख ने यह भी कहा कि देश के युवा तभी संविधान को आत्मसात कर सकेंगे जब उन्हें इसकी व्यापक जानकारी दी जाएगी। उन्होंने इसे देश के भविष्य के लिए एक अहम कदम बताया और सरकार से इस दिशा में ठोस निर्णय लेने का आग्रह किया।
यह मांग संविधान दिवस के महत्व को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और देश के युवाओं में संवैधानिक मूल्यों को रचने-बसाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
सूरज कुमार की रिपोर्ट