कवर्धा। चिल्फी में खोले गए आरटीओ बैरियर पर अब भी पारदर्शिता नहीं है। यहां बिना वेब ब्रिज के ओवरलोड वाहनों की जांच हो रही है। कांस्टेबल सिर्फ अनुमान के आधार पर गाड़ियों में लदे सामान का वजन तय कर रहे हैं। वेब ब्रिज लगाने का प्रस्ताव है, लेकिन अब तक जमीन नहीं मिली। अफसरों का कहना है कि चिल्फी वन क्षेत्र में आता है, इसलिए राजस्व जमीन नहीं मिल रही।

चिल्फी बैरियर से रोजाना सैकड़ों मालवाहक वाहन गुजरते हैं। यहां से सरकार को सालाना 12 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है। लेकिन ट्रकों के वजन मापने का कोई जरिया नहीं है। ट्रक मालिक ज्यादा माल लादकर कम टैक्स देकर सरकार को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ओवरलोड ट्रक पर 3 हजार रुपए चालान और प्रति टन ओवरलोड पर 2 हजार रुपए अतिरिक्त फाइन तय है। लेकिन बिना वेब ब्रिज के वजन का सही आकलन नहीं हो पा रहा।

वेब ब्रिज होने से जांच में पारदर्शिता आती। यह ऑनलाइन सिस्टम से परिवहन कार्यालय से जुड़ा रहता है। ओवरलोड माल का सही वजन पता चलता और उसी आधार पर फाइन वसूला जाता। परिवहन विभाग को भी जानकारी मिलती कि किस बैरियर से कितने ओवरलोड वाहन गुजरे।

राष्ट्रीय राजमार्ग-30 छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश को जोड़ता है। यह चिल्फी बॉर्डर से मध्यप्रदेश के मंडला के मोतीनाला को जोड़ता है। जबलपुर से रायपुर और ओडिशा जाने वाले भारी वाहन इसी रास्ते से गुजरते हैं।

By जन स्वराज न्यूज़ 24

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