रायपुर। 10 जून 2024 की घटना के बाद क्या अब सतनामियों के हर कार्यक्रम में उस तरह की स्थिति बनने की आशंका जताई जाएगी, जिसके लिए अब शपथ पत्र लिया जाएगा? हम तो बलौदाबाजार की घटना के लिए सीबीआई जांच की मांग करते हैं। सरकार ही पीछे हट रही है, ना ही एसआईटी गठित कर जांच करवा रही है। लेकिन वही सरकार कबीरधाम जिले के लोहारीडीह में पुलिस की कार्रवाई के बाद एसआईटी गठित कर साहू समाज के लोगों को दो माह के भीतर राहत पहुंचाई। आरक्षण से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को इस पर विचार करना चाहिए।
1️⃣ 24 वर्षीय सरस्वती मन्नाडे नामक महिला पुलिस पर गंभीर आरोप लगा रही हैं। पुलिस की पिटाई से गर्भपात हो जाने के अलावा, पुलिस पर मोबाइल और रुपये लूटने और आगजनी के आरोप भी लगा रही हैं। लेकिन सतनामी जाति के कारण उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। हम सरकार से सरस्वती मन्नाडे जी का नार्को टेस्ट करवाने की मांग करते हैं, ताकि आरोप की सत्यता का पता चल सके।
2️⃣ 10 जून 2024 के ही दिन बलौदाबाजार शहर में सतनामियों के लिए सरकारी आबंटित जमीन में स्थापित जैतखाम को जला दिया गया, लेकिन इस पर किसी ने संज्ञान नहीं लिया। क्या आंदोलनकारी ही अपने जैतखाम को जला दिए?
3️⃣ 10 जून 2024 को ही बलौदाबाजार शहर स्थित सतनाम गुरूद्वारा परिसर के बाउंड्री वाल के अंदर और बाहर आंदोलनकारियों द्वारा पार्क की गई दुपहिया और चारपहिया वाहनों को आग लगा दी गई। क्या आंदोलनकारी ही अपने खुद के वाहनों को आग लगा दिए? इस पर आज तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। सतनामी जाति के प्रमाण पत्र के सहारे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के मन में भय इस कदर हावी है कि वह बलौदाबाजार की घटना पर चुप्पी साध लेते हैं या समाज को ही दोषी ठहराकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

भारत देश में कानून पूरी तरह से दलितों पर ही लागू होता है, और जो कानून नहीं रहता, उसे शासन-प्रशासन पर बैठे जातिवादी लोग अपनी मंशा अनुसार असंवैधानिक कानून बनाकर लागू कर देते हैं। जिसका पालन करने के लिए हमारे वर्ग के लोगों को बाध्य कर दिया जाता है। सरकार द्वारा हमारे लोगों पर दमनात्मक कार्रवाई इस तरह की जाती है कि पूरे समाज में भय का माहौल बना रहे।
संजीत बर्मन
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