नई दिल्ली। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, डॉ. मनमोहन सिंह जी का निधन देश और दुनिया के लिए एक गहरी क्षति है। उनकी नेतृत्व क्षमता और विशेष रूप से अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। डॉ. सिंह जी का निधन उन शख्सियतों के लिए एक बड़ा झटका है, जो राजनीति के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को भी महत्व देते हैं।

उनकी उदारीकरण नीतियों के कारण आज करोड़ों भारतीयों के पास ‘भोजन का अधिकार’ है। उनकी नीतियों ने देश की आर्थिक दिशा को एक नई ऊंचाई दी, जिससे भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान बना।
मनरेगा योजना, जिसे डॉ. सिंह के कार्यकाल में लागू किया गया, ने भारत के दूरदराज के गांवों में रोजगार के अवसर प्रदान किए। इस योजना ने लाखों लोगों को गरीबी से उबारने में मदद की और ग्रामीण भारत को सशक्त बनाया।
कोरोना महामारी के दौरान भी उनकी योजनाओं की अहम भूमिका रही। मनरेगा के माध्यम से लाखों लोग घर बैठे रोजगार प्राप्त करने में सक्षम हुए और उन्हें राहत मिली। इसके कारण, कई परिवारों को भोजन और जीवनयापन में मदद मिली।
डॉ. मनमोहन सिंह जी की विलक्षण प्रतिभा और उनके योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। उनका योगदान भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था के इतिहास में हमेशा स्वर्णाक्षरों में दर्ज रहेगा।