छत्तीसगढ़। बलौदा बाजार कलेक्टर परिसर में हुए आगजनी कांड में एक पीड़ित महिला, सरस्वती मन्नाडे, ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सरस्वती का कहना है कि उनके और उनके पति पर हुए अत्याचारों की सच्चाई अब सामने आनी चाहिए।
सरस्वती मन्नाडे के अनुसार, 10 जून 2024 को बलौदा बाजार के कलेक्ट्रेट परिसर में हुए आगजनी कांड से उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन वह और उनके पति बलौदा बाजार में सामान लेने गए थे। उसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और उनके मोबाइल व अन्य कागजात जला दिए।
महिला का आरोप है कि पुलिस की ज्यादती के कारण उनके गर्भ में पल रहे बच्चे का गर्भपात हो गया। उनको भी दो दिन जेल में रखा गया, सरस्वती ने यह भी बताया कि उनके पति संपत मन्नाडे को जेल में डाल दिया गया है, जिससे उनका परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
सरस्वती मन्नाडे ने न्याय की गुहार लगाई है और सभी से मदद की अपील की है। उन्होंने कहा कि उनके जीवन यापन के साधन खत्म हो गए हैं, और वर्तमान स्थिति बेहद कठिन हो गई है।
गौरतलब है कि 10 जून 2024 को सतनामी समाज के जैतखाम को जलाने के विरोध में धरना प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने कलेक्ट्रेट ऑफिस में आगजनी कर दी थी। इस घटना के बाद से सतनामी समाज के कुल 187 लोगों को अब भी जेल में रखा गया है।
संवादाता सूरज कुमार